Tuesday, 3 May 2016

                                                   पहली बार जब टीवी देखा

मुझे याद है वो दिन जब काले रंग के एक बॉक्स में एक मोटे से शीशे के पीछे कुछ लोगों को आपस में बातें करते हुए देखा था. कभी वो हमारी तरफ देखते तो कभी आपस में, कभी वो मार पीट करते तो कभी गले मिलते,कभी हंसते तो कभी रोते, मुझे बड़ा मजा आता था जब किसी गुंडे की पिटाई होती थी, मैं खुश होकर तालियाँ बजाती,जब वो हंसते तो मेरे चेहरे पर हंसी देखने को मिलती और वो कभी रोते तो मेरे चेहरे पर भी मायूसी छा जाती और कभी कभी तो हद ही हो जाती थी जब मेरे आँखों में आंसू आ जाते थे किसी सीन को देख कर. मैं अपने अगल बगल वालों की आँखों में झाँक कर देखती की कही मैं अकेले रोने वालों में से तो नहीं.सब कुछ काले व सफ़ेद रंग में दीखता था.जब कभी उस शीशे पर काले सफ़ेद रंग के बिंदु दिखाई देने लग जाते थे जिन्हें हम मच्छर बोलते थे. उन मच्छरों के आने के बाद उन चार पांच डंडो से मिलकर बने स्टैंड को इधर उधर घुमाते देखा था, इसलिए जब कभी ऐसा होता मैं छत पर भाग कर जाती और उन डंडों को हिला कर आ जाती. बाद में पता चला वो टीवी का एंटीना था .....


                                                                         स्नेहा शर्मा

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